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पौड़ी । जनपद पौड़ी गढ़वाल के बीरोंखाल विकासखंड में पौड़ी और अल्मोड़ा जिलों की सीमा पर ऊँचे पर्वत शिखर पर स्थित कालिंका देवी मंदिर श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। देवी काली को समर्पित यह प्राचीन शक्ति पीठ धार्मिक मान्यताओं, लोकविश्वासों और प्राकृतिक सौंदर्य के अनूठे संगम के रूप में प्रसिद्ध है।

सदियों पुरानी आस्था का केंद्र

कालिंका देवी मंदिर को क्षेत्र की प्राचीन शक्ति पीठों में प्रमुख माना जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार माँ कालिंका देवी अपने भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करती हैं तथा उन्हें साहस, शक्ति और सुरक्षा का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। यही कारण है कि वर्षभर यहाँ श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।

नवरात्रि में उमड़ती है भक्तों की भीड़

नवरात्रि और विशेष धार्मिक अवसरों पर मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर हो उठता है। दूर-दूर से पहुंचे श्रद्धालु माँ के दर्शन कर पूजा-अर्चना करते हैं। इस दौरान मंदिर परिसर जयकारों और भक्ति गीतों से गूंज उठता है।

प्राकृतिक सौंदर्य भी करता है आकर्षित

ऊँचे पर्वत शिखर पर स्थित मंदिर से हिमालय की बर्फ से ढकी चोटियों का विहंगम दृश्य दिखाई देता है। चारों ओर फैली हरियाली, शांत वातावरण और पर्वत श्रृंखलाओं की मनमोहक छटा श्रद्धालुओं और पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित करती है।

सांस्कृतिक विरासत का गौरवशाली प्रतीक

आस्था और प्रकृति के अद्भुत मेल से सुसज्जित कालिंका देवी मंदिर उत्तराखंड की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है। यह मंदिर न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि पर्वतीय पर्यटन और स्थानीय संस्कृति को भी नई पहचान प्रदान कर रहा है।

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By रोहित वर्मा

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