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देश और धर्म को आगे बढ़ाने में गुजरात प्रांत का अग्रणी योगदान-श्रीमहंत डा.रविंद्रपुरी
सेवा का प्रमुख केंद्र होगा नूतन विश्रांति भवन-पुराणी स्वामी धर्मनंदन दास
हरिद्वार, 13 सितम्बर। श्री स्वामिनारायण मंदिर भुज कच्छ गुजरात के संयोजन में जगजीतपुर में निर्मित किए जा रहे नूतन विश्रांति भवन का शिलान्यास समारोह संत महापुरूषों और श्रद्धालु भक्तों की उपस्थिति में आयोजित किया गया। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत डा.रविंद्रपुरी महाराज की अध्यक्षता में आयोजित शिलान्यास समारोह में शामिल हुए संत महापुरूषों का महंत पुराणी स्वामी धर्मनन्दन दास महाराज, आचार्य कौशलेंद्र प्रसाद महाराज, उपमहंत स्वामी भगवद जीवन दास महाराज, कोठारी पार्षद जादवजी भगत, स्वामी देवप्रकाश दास ने सभी संत महापुरूषों का फूलमाला पहनाकर स्वागत किया। समारोह को संबोधित करते हुए अखाड़ा परिषद अध्यक्ष श्रीमहंत डा.रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि देश और धर्म को आगे बढ़ाने में गुजरात प्रांत का अग्रणी योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि महंत पुराणी स्वामी धर्मनंदन दास महाराज के नेतृत्व में भक्तों के सहयोग से निर्मित होने वाला भव्य नूतन विश्रांति भवन उत्तराखंड की पावन धरा पर सनातन धर्म और अध्यात्म को नई ऊंचाईयां प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि जो धर्म की रक्षा करता है। धर्म उसकी रक्षा करता है। आह्वान पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अरूण गिरी महाराज ने सभी श्रद्धालु भक्तों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि कुंभ की पूर्व संध्या पर एक विशाल धर्म भवन के शिलान्यास समारोह में श्रद्धालु भक्तों की भारी उपस्थ्तिि कुंभ पर्व का दर्शन करा रही है। जिसके लिए पुराणी स्वामी धर्मनंदन दास महाराज बधाई पात्र हैं। महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद महाराज ने कहा कि स्वामिनारायण भगवान विष्णु के अवतार हैं। श्रद्धालु बद्रीनारायण, सत्य नारायण, लक्ष्मी नारायण आदि विभिन्न रूपों में उनकी ही आराधना करते हैं। महंत पुराणी स्वामी धर्मनन्दन दास महाराज ने सभी संतों का आभार व्यक्त करते हुए भक्तों के सहयोग से स्थापित किए जा रहा भवन धर्म और अध्यात्म की धारा प्रवाहित करने के साथ सेवा का भी प्रमुख केंद्र होगा। महामंडलेश्वर स्वामी सत्यश्रेयानंद गिरी ने कहा कि सभी को धर्म के मार्ग चलना चाहिए। धर्म के मार्ग का अनुसरण करने वाले सदैव कल्याण होता है। कार्यक्रम का संचालन स्वामी रविदेव शास्त्री ने किया। मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती महाराज, स्वामी हरिवल्लभदास शास्त्री, महामंडलेश्वर स्वामी रामेश्वरानंद सरस्वती, महामंडलेश्वर स्वामी ललितानंद गिरी, महामंडलेश्वर स्वामी मोहनानंद, महंत दर्शन भारती, महामंडलेश्वर स्वामी सत्यश्रेयानंद गिरी, स्वामी रविदेव शास्त्री, स्वामी दिनेश दास, स्वामी ज्योर्तियानंद, कथाव्यास स्वामी आनंद महाराज सहित अनेक संत महंत और बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त मौजूद रहे।

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By रोहित वर्मा

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